दुनिया की वो मस्जिद जिसे जिन्नो ने बनाया “मस्जिद” और नक्काशी देखकर लोगो ने अपने मुँह पर हाथ रखा देखे फोटो में "जाने इसके बारे में" ?





इस दुनिया में बहुत से सवाल ऐसे है जिनका कोई जवाब नहीं है और बहुत से ऐसी अजीबो गरीब चीज़े ,इमारते ऐसी है जिन्हे देखकर मुँह से खुद निकल जाता  है की - ये कैसे बना होगा ? किसने बनाया होगा ? क्यों बनाया होगा ?


बहुत से सवाल है जिनके जवाब नहीं है दुनिये भर के वैज्ञानिक सोचने पर मजबूर है आखिर ऐसे कैसे हो गया ऐसी ही एक मस्जिद के बारे में ,मैं आप को बताने जा रहा हूँ,जिसकी नक्काशी ,बनावट ,मीनारे अदुभुत है या यूं कहे सोचने पर एक विराम लग जाता है



मलेशिया की ताबांग मस्जिद को देखकर ,सुनकर ,लोगो या तो कानो पर या मुँह पर या यु कहे आँखों पर भी हां रख लेते है -

इस मस्जिद को मजदुर और कारीगरों ने नहीं बनाया इसकी पुष्टि दुनिया बार के वैज्ञानिक कर चुके है क्युकी इसकी दीवारों पर नक्काशी ऐसी और इतनी बारीक की गई है जो मशीनों से बिलकुल मुमकिन नहीं है -  उस समय जब ये मस्जीद तिमार (बनाई गई) इसमें 2 से लेकर 5 कुंतल के पत्थर इस्तेमाल किये गए है !




ये मस्जिद मलेशिया शहर के मलंग शहर ईस्ट जावा में है यहां के लोग इस बात की गवाही देते है की एक सभा जब वो सोकर उठे तो ये मस्जिद उन्हें बनी हुई मिली !
ये मस्जिद 1991 में तिमार की गई जो की ज़्यादा समय नहीं हुआ !






इस बारे में एक कहानी बहुत प्रचलित है की इसमें जो भी बन्दा फ़ज़्र की नमाज़ पढ़ने जाता है वो ईशा की नमाज़ पढ़कर निकलता है ।लोग कहते है इस मस्जिद में आकर उन्हें सुकून मिलता है और दिल दिमाग हर चीज़ को भूल जाता है और एक हवा ाल्कि सी चलती है जिमे इंसानो को नींद के झोके आने लगते है जब वो नमाज़ नहीं पढ़ रहा होता !
बताया जाता है जब इसमें जिन्न काम  कर रहे थे इसके मीनार का काम चलर रहा था और जैसे ही फ़ज़्र की अज़ान हुई काम रूक गया ,और आज तक उस गुम्बद को कोई भी कारीगर पूरी नहीं कर सका है और उस मीनार से पानी  कभी नहीं टपकता जो की हैरत की बात है -!


दुनिया की वो मस्जिद जिसे जिन्नो ने बनाया “मस्जिद” और नक्काशी देखकर लोगो ने अपने मुँह पर हाथ रखा देखे फोटो में "जाने इसके बारे में" ? दुनिया की वो मस्जिद जिसे जिन्नो ने बनाया “मस्जिद” और नक्काशी देखकर लोगो ने अपने मुँह पर हाथ रखा देखे फोटो में "जाने इसके बारे में" ? Reviewed by Online GK News on March 12, 2019 Rating: 5

No comments:

Powered by Blogger.